Wednesday, 28 December 2016

ऐसे फेंक दीं लाशें, सामने आया पुलिस का शर्मनाक चेहरा


यूपी के गाजीपुर में पुलिस का शर्मनाक चेहरा सामने आया है। यहां के पुलिस वालों की हरकत जान आप भी दंग रह जाएंगे। उन्‍होंने लावारिस व्यक्तियों के शव को पोस्टमॉर्टम के बाद दाह संस्कार के बजाय नाले में फेंक दिया। मामले का खुलासा गुरुवार को उस समय हुआ, जब पुलिस वालों द्वारा फेंका गया शवनाले से बरामद हुआ। आरोपित सिपाही और होमगार्ड को निलंबित कर दिया गया है।
बोरे में मिले शव
- गाजीपुर में डीएम आवास के बगल से गुजरने वाले नाले में गुरुवार को कई बोरे में बंद शव मिले।
- शव की शिनाख्त नहीं हो पाई थी। शव बुरी तरह सड़े गले थे। 
- पुलिस मामले की छानबीन कर रही थी। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया तो मालूम चला कि शवों का तो पोस्टमॉर्टम हो चुका है। 
- ये सुनकर पुलिस अफसरों के होश उड़ गए।
- उनमें से 1 का तो पिछले 15 दिसंबर को ही पोस्‍टमॉर्टम हुआ था।

- तफ्तीश की गई तो खुलासा हुआ कि गाजीपुर जिला अस्पताल में भर्ती एक लावारिस व्यक्ति कि पिछले 12 दिसंबर को इलाज के दौरान मौत हो गई थी। 
- इसके बाद उसकी शिनाख्त के लिए तीन दिनों तक शव मर्चरी में रखा गया। 
- शिनाख्त न हो पाने पर शव का पोस्टमॉर्टम किया गया और शव को दाह संस्कार के लिए एक सिपाही-होमगार्ड को सौंप दिया गया। 
- आरोपी सिपाही और होमगार्ड ने शव का दाह संस्कार कराने के बजाय लावारिस शव को बोरे में भरा और नाले में फेंक दिया।
- लेकिन उनकी ये अमानवीय करतूत सबके सामने आ गई, जब शव नाले से निकाला गया।
क्‍या कहती है पुलिस
- पुलिस के मुताबिक, जो हुआ ये बेहद शर्मनाक है, ऐसा नहीं होना चाहिए।
- फिलहाल आरोपी सिपाही बुद्धिमान सिंह और होमगार्ड को तत्‍काल प्रभाव से सस्‍पेंड कर दिया गया है।

Source - Dainik Bhaskar

कचरे में मिली एक दिन की बच्‍ची, इस पुलिसवाले का काम सुन करेंगे Salute


यूपी के झांसी में 25 दिसंबर को किसी मां ने कचरे के ढेर पर एक दिन की बच्‍ची को ठंड में छोड़ दिया। इस बच्ची को एक पुलिस वाले और उसकी पत्नी ने अपना लिया। दोनों ने मिलकर बच्ची का नाम यीशु रखा है। उनका कहना है कि बच्ची उनके लिए क्रिसमस का तोहफा है। दंपत्ति के इस कदम को जिसने भी सुना वो उन्‍हें सेल्‍यूट कर रहा है।  
 
- झांसी के नवाबाद थाना क्षेत्र के पास पुलिस कॉलोनी में एक खंडहरनुमा भवन है। 
- यहां कचरे के कई ढेर भी हैं। आस-पास लोगों ने किसी बच्चे के रोने की तेज आवाज सुनी। 
- लोग खंडहर की तरफ गए तो दंग रह गए। वहां एक नवजात बच्ची ठंड में कूड़े के ढेर पर पड़ी हुई थी। 
- सूचना मिलने पर पुलिस कॉलोनी में रहने वाले अतीश यादव और उनकी पत्नी अंजू यादव भी मौके पर पहुंच गए।
 
 
पुलिसवाले ने लिया बच्‍ची को गोद  
 
 
- अतीश यादव झांसी के सीपरी बाजार थाने में ि‍सिपाहीके पद पर तैनात हैं।   
- उन्‍होंने तुरंत ही बच्ची के लिए नए कपड़े खरीदे। उसे कपड़े पहनाए। 
- इसके बाद उन्‍होंने नवाबाद थाना पुलिस को प्रार्थना पत्र देकर बच्ची को गोद लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी।
 
 
सिर्फ एक दिन की है बच्‍ची 
 
 
- अतीश ने बताया कि ये सब काम आनन-फानन करने के बाद वो बच्ची को लेकर डॉक्टर्स के पास पहुंचे। 
- वहां डॉक्टर्स ने बच्ची को पूरी तरह से स्वस्थ बताया। डॉक्टर्स के मुताबिक, बच्ची सिर्फ एक दिन की थी।
 
 
दो साल पहले इस कपल की हुई है शादी
 
 
- अतीश की पत्नी अंजू ने बताया कि दो साल पहले उनकी शादी हुई। 
- अभी उनका कोई बच्चा नहीं है। अब ये बच्ची ही उनकी बेटी है। 
- अंजू ने कहा कि कोई कैसे एक दिन पहले जन्मी मासूम को इस तरह ढेर पर फेंक सकता है। 
- जिसने इसे जन्म दिया वो जरूर देख रही होगी। कोई और नहीं है, अब मैं ही इसकी असली मां हूं।
 
 
क्रिसमस के कारण नाम रखा यीशु
 
 
- क्रिसमस पर मिलने के कारण बच्ची का नाम यीशु रखा है। 
- अंजू का कहना है कि क्रिसमस पर भगवान ने उन्हें तोहफा दिया है। 
- इसलिए भगवान के नाम पर ही इसका नाम होना चाहिए।

Source- Dainik Bhaskar

मैंने तो सिर्फ मदद मांगी थी, उन्होंने धक्के मारकर भगा दिया..बेटे को खोने वाले पिता की आप बीती..


चार अफसरों को हटाने के बाद भी हमीदिया का हाल नहीं बदला है। मंगलवार सुबह सर्जिकल वार्ड-2 में भर्ती गुना के एक मरीज के पिता ने इलाज नहीं मिलने की शिकायत सीनियर डॉक्टर से की तो जूनियर डॉक्टरों ने उन्हें पीटकर बाहर निकाल दिया। दोपहर बाद मरीज की मौत हो गई। 

मेरे 20 साल के बेटे अमीन की आंतों में छेद थे। ऑपरेशन के बाद सर्जिकल वार्ड-2 में भर्ती किया गया। तबीयत ज्यादा खराब होने पर उसे वेंटिलेटर पर रखा। उसके पेट में पाइप लगा था, वह लीक हो रहा था। उसमें से खून और पानी बह रहा था। ड्यूटी डॉक्टर से शिकायत की तो ध्यान नहीं दिया। नर्सिंग स्टाफ से चादर बदलने को कहा, लेकिन नहीं बदली गई। सीनियर डॉक्टर राउंड पर आए तो उनसे शिकायत की। इस पर जूनियर डॉक्टर भड़क गए। एक ने मेरे साथ मारपीट शुरू कर दी। गार्ड भी गलियारे तक मुझे धक्का मारते रहे। दोपहर बाद बेटे की मौत हो गई।



अमीन के परिजन कोहेफिजा थाने में एफआईआर दर्ज कराने के लिए पहुंचे। लेकिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। कोहेफिजा टीआई अनिल वाजपेयी का कहना है कि जांच चल रही है। जल्दी आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

वर्ष 2016 की आखिरी कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी मंत्री अपने विभागों के बारे में सोचें। दो साल बचे हैं। न खाएं और न ही किसी को खाने दें। कुछ भी होता है तो जिम्मेदारी विभागीय मंत्री की होती है। हमीदिया का प्रकरण सबके सामने है। हमने अधिकारी हटाए या सस्पेंड किए। इसलिए मंत्री ध्यान रखें।

‘डिजिटल इंडिया: विद लाडो’ अभियान की शुरूआत


जींद की बीबीपुर पंचायत ने एक मुहिम आज से शुरू की है जिसमें अब घरों के बाहर पुरूष प्रधान की नेमप्लेट नजर नहीं आएगी बल्कि अब उनकी जगह उनके घरों की बेटियों के नाम से नेमप्लेट लगी होगी.
‘बेटी बचाओ-सेल्फी बनाओ’ प्रतियोगिता के बाद प्रधानमंत्री से वाहवाही लूटने के बाद देश की पहली डिजिटल पंचायत बीबीपुर रविवार से ‘डिजिटल इंडिया: विद लाडो’ अभियान शुरूआत की.
सरपंच सुनील जागलान गांव के 30 घरों के मुख्य द्वार पर बेटियों के नाम की नेम प्लेट लगाकर इसकी शुरुआत की. बीबीपुर पंचायत के सरपंच ने आज खुद अपने घर की नेम प्लेट हटाकर उसकी जगह अपनी बेटी के नाम की नेम प्लेट लगायी.
इसके तहत बीबीपुर पंचायत के नुमाइंदे जींद के हर घर तक पहुंचेगे. हर घर के मुखिया एवं सदस्य को समझायेंगे कि नारी का सम्मान ही घर की असली शोभा है. इसलिए आप सब अपने घरों के दरवाजों पर अपनी नेम प्लेट की बजाय अपनी बेटी के नाम पर नेम प्लेट लगाए.
बेटियों के नाम के साथ नेम प्लेट के उपर ई-मेल और इसके साथ नेम प्लेट पर ‘डिजिटल इंडिया: विद लाडो’ भी लिखा है. सरपंच का कहना है कि वे चाहते है कि हर घर के बाहर घर के मुखिया का नाम नहीं बल्कि घर की लड़की का नाम हो. इसको लेकर यह मुहिम शुरू की गई है.
उन्होंने कहा कि वह इस मुहिम को हर घर तक लेकर जाऐंगे और उनका पूरा प्रयास होगा कि पहले चरण में बीबीपुर के हर घर के बाहर उनकी बेटी के नाम से नेम प्लेट लगाई जाए. नेम प्लेट लगाने का खर्चा खुद पंचायत वहन करेगी.
सरपंच ने कहा कि बेटी बचाओ-सेल्फी बनाओ प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले प्रतिभागियों से भी अभियान के साथ जुडऩे की अपील की जाएगी.
पंचायत ने गांव में एक कार्यक्रम में गांव की महिलाओं और लड़कियों से मोबाइल से जुडी ऐसी सच्ची घटना लिखकर मांगी गयी, जिस घटना ने उनकी जिंदगी बदल दी हो. पंचायत ने ऐसी तीन महिलाओं को 25, 15 व 10 हजार रूपए इनाम देकर सम्मानित किया गया.
Image Source- India TV

16 साल पहले बिछड़े बाप-बेटे का मिलन हुआ इस ईद पर


वैसे तो हर ईद किसी ना किसी मामले में लोगों के लिए खास होता है लेकिन इस बार का ईद एक बाप और बेटे के लिए सही मायने में किसी फिल्मी कहानी से कही अधिक स्पेशल होगी . 26 साल के जाहिद पाशा के लिए यह ईद काफी स्पेशल इसलिए थी क्योंकि वह इसी दिन अपने पिता से 16 साल बाद मिलने वाला है. 
जी हां! उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के एक मदरसे से अगवा हुए जाहिद की जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. दरअसल 16 साल पहले जाहिद को अपहरणकर्ताओं ने  किडनैप कर कर्नाटक के टुमकुर रेलवे स्टेशन पर ले जाकर छोड़ दिया.
आपको बता दें कि अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक उस समय कर्नाटक में जाहिद के पास हरियाणा के मेवात में रह रहे अपने परिवार से संपर्क करने का कोई साधन नहीं था और ना ही उनके पास कोई कॉन्टैक्ट बचा था.
इसके बाद जाहिद की मदद हरियाणा के ही जींद जिले के बीबीगांव के सरपंच सुनील जागलान ने की. आपको बता दें कि सुनील वही शख्स हैं जिनके ‘सेल्फी विद डॉटर’ कैंपेन को खुद पीएम मोदी ने खूब सराहा था.
सुनील ने जाहिद के परिवार को खोजने में मदद की. बेंगलुरु से 70 किमी दूर टुमकुर में ही रह रहे जाहिद ने हमारे टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि वह अपने परिवार से मिलने को लेकर बहुत ही उत्साहित हैं. वह 17 जुलाई तक अपने परिवार के पास पहुंच जाएंगे.
खास बात यह है कि जाहिद को अगवा करने वाला उनका ही एक साथी था जो मदरसे में उनके साथ था. टुमकुर में जाहिद ने एक मस्जिद मे पनाह ली जहां एक केबल ऑपरेटर फारुक पाशा उन्हें अपने साथ ले गए.
आपको बता दें कि वहां जाहिद, फारूक के सहायक के तौर पर काम करने लगे और टुमकुर की ही अकीला बानो के साथ निकाह कर लिया. आज उनके दो बच्चे हैं. हालांकि, जाहिद आज तक यह अंदाजा नहीं लगा पाए कि आखिर उन्हें अगवा क्यों किया गया था.
जाहिद का अपने परिवार से मिलने का इंतजार तब खत्म हुआ जब बीते रविवार उन्हें इंटरनेट पर जागलान का फोन नंबर मिला. सुनील जागलान ने जाहिद की पूरी कहानी सुनी और जींद और मेवात की पुलिस से संपर्क किया. इतने सालों में जाहिद लगभग सब भूल चुके थे. उन्हें बस इतना याद था कि उनके अब्बा का नाम अकबर और गांव का नाम ‘सुनेदा’ था.
जागलान ने इस गांव के सरपंच और पुराने सरपंचों से इस बारे में बात की तो पता चला कि अकबर हुसैन का बेटा वर्षों पहले लापता हो गया था. जाहिद 16 साल बाद अपने परिवार के पास पहुंचने जा रहे हैं. शायद यह ईद उनकी जिंदगी की सबसे यादगार ईद है.

कोकीन की लत को छुड़ाने और लगाने वाला एक ‘स्विच’


चीनी वैज्ञानिकों ने एक ऐसा नया प्रोटीन विकसित करने का दावा किया है जो कि कोकीन की लत को छुड़ाने और लगाने वाले एक ‘स्विच’ की तरह काम कर सकता है.
कोकीन डोपामाइन का स्तर बढ़ाकर मस्तिष्क को प्रभावित करती है. डोपामाइन मस्तिष्क संबंधी एक ऐसा ट्रांसमीटर है, जो कि मस्तिष्क के कामकाज में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाता है. इन भूमिकाओं में सम्मान एवं आनंद की अनुभूति भी शामिल है.
कोकीन उन प्रोटीनों पर रोक लगाती है, जो कि डोपामाइन को पुन: अवशोषित कर लेते हैं. इससे डोपामाइन पैदा होता जाता है और व्यक्ति को ‘‘उच्चतम’’ स्तर पर आनंद की अनुभूति होती है.
चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज के तहत आने वाले शंघाई इंस्टीट्यूट्स फॉर बायोलॉजिकल साइंसेज के एक दल के प्रमुख शोधकर्ता झोउ जियावेई ने कहा कि लत लगने के दौरान डोपामाइन ट्रांसपोर्टर :डीएटी: नामक प्रोटीन तंत्रिका कोशिका में गति करते हुए कोशिका की सतह पर आ जाता है.
झोउ के हवाले से सरकारी अखबार चाइना डेली ने कहा, ‘‘हमने पाया कि मस्तिष्क में डीएटी की स्थिति ही प्रमुख अंतर पैदा करती है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘उलट स्थिति में यह स्थानांतरण नहीं होगा और इस तरह से लत बढ़ने पर रोक लगाई जा सकती है.’’ शोध दल का मानना है कि लत पर रोक लगाने की कुंजी वीएवी2 नामक छोटे से प्रोटीन में छिपी है, जो कि डीएटी के स्थानांतरण का नियमन करते हुए एक आणविक स्विच की तरह काम करता है.
वैज्ञानिकों का कहना है कि वीएवी2 की इस भूमिका की खोज का इस्तेमाल कोकीन के आदी लोगों को सुधारने के प्रयासों में किया जा सकता है. दूसरे किस्म के नशीले पदाथरें के आदी लोगों को सुधारने के लिए अलग उपाय करने होंगे.
इस खोज से जुड़ा शोधपत्र सात जुलाई को न्यूयार्क के जर्नल नेचर न्यूरोसाइंस की वेबसाइट पर छपा था.

एक खबर ने पूरी दुनिया में कोका कोला को लेकर खलबली मचा दी है.


एक खबर ने पूरी दुनिया में कोका कोला को लेकर खलबली मचा दी है.
‘दी रेनिगेड फार्मासिस्ट’ नाम से ब्लॉग चलाने वाले ब्रिटेन के पूर्व फार्मासिस्ट नीरज नाइक ने कोल्ड ड्रिंक पीने के बाद शरीर के अंदर होने वाले प्रभावों को सबके सामने लाया है. अब इस खबर के बाद से पूरी दुनिया ने कोका कोला पर बने उनके ब्लॉग को सार्वजिनक किया है. जिसके कारण सोशल साइट्स पर ये फिलहाल ट्रैंडिंग टॉपिक में बदला हुआ है.
नीरज नाइक ने एक ग्राफिक के माध्यम से बताया कि कैसे ये ड्रिंक्स शरीर से जरूरी खनिज तत्व बाहर कर देते हैं और इंसान मानसिक और शारीरिक रूप से बदलने लगता है. उन्होंने एक कैन कोक के सेवन से अगले एक घंटे में होने वाले प्रभाव के बारे में बारी बारी से लिखा –
पहले 10 मिनट –  जब आप एक केन कोक पीते हैं तभी आपके शरीर में 10 चम्मच शुगर एकसाथ जाती है. ये मात्रा 24 घंटे में लिए गए शुगर के बराबार होती है. अचानक इतना मीठा खाने से आपको उलटी भी हो सकती है लेकिन इसमें मिले फॉस्फोरिक एसिड के कारण ऐसा नहीं होता. वो इसका टेस्ट बदल देता है.
20 मिनट बाद – पीने के 20 मिनट बाद ही पीने वाले की ब्लड शुगर एकदम से बढ़ जाती है. जिसके कारण शरीर से इंसुलिन  तेजी से निकलता है. शरीर का लिवर इस पर प्रतिक्रिया करता है और इसे फैट में बदलने लगता है.
40 मिनट बाद- अब पीने वालों के शरीर में कैफीन की काफी मात्रा चली जाती है. दूसरी तरफ ब्लड प्रेशर भी बढने लगता है. इसे देखते हुए आपका लिवर खून में और शुगर भेजता है. मस्तिष्क में खून जाना कम होता है जिसके बाद झपकी आनी शुरु हो जाती है.
45 मिनट बाद – इतने समय बाद आपके शरीर को हिरोइन(मादक पदार्थ) लेने जैसा लगने लगता है. शरीर डोपामाइन का उत्पादन बढ़ा देता है. इससे मस्तिष्क का खुशी देने वाला हिस्सा सक्रिय हो जाता है.
60 मिनट बाद – कोक पीने के एक घंटे के बाद तीन प्रक्रिया होती है –
फास्फोरिक एसिड आपके शरीर के निचले इंटेस्टाईन में कैल्शियम,मैग्निशियम और जिंक को इकट्ठा करता है. इससे मेटाबोलिज्म बढ़ता है. शुगर और अन्य आर्टिफिशियल स्वीटनर्स की बढ़ी मात्रा के कारण मेटाबोलिज्म और बढ़ता है. इसके बाद लोग यूरीन के लिए जाते हैं जिसमें कैल्सियम बाहर निकलता है.
2- कैफीन की तरल करने वाला गुण अपना असर दिखाना शुरु करता है और आप बार बार पेशाव के लिए जाते हैं. जिससे शरीर से कैल्शियम, मैग्निशियम, जिंक, सोडियम और पानी बाहर चला जाता है जो वास्तव में आपकी हड्डियों में जाना था.
3- जैसे ही यह प्रक्रिया होती है मीठेपन का अहसास बढ़ जाता है. आप चिड़चिड़े और आलसी हो जाते हैं. कोक में वास्तव में मौजूद पानी यूरिन के जरिए बाहर निकल जाता है. इस तरह कोक पीने से आपके शरीर में हड्डियों और दांतों के लिए आवश्यक खनिज शरीर से बाहर निकल जाते हैं.
वहीं दूसरी तरफ कोका कोला के अधिकारियों ने इस बात को खारिज करते हुए कहा है कि ”हमे चाहने वाले पिछले 129 साल से इसे पी रहे हैं उन्हें कोई तकलीफ नहीं है. ये उसी तरह सेफ है जैसे दूसरे अन्य पेय पदार्थ.”